Friday, April 17, 2020

शोर

शोर से आबाद इस दुनिया मे सन्नाटे का ख़ौफ है
उम्मीदों के कल के आगे आज का अंधेरा चुपचाप  है

गली मोहल्ले की गर्म सुर्ख़िया गुमशुदा है आजकल
ताकझाँँक करती खिड़कियों मे गूंजती कोयल की कुक है

जाने पहचाने कुछ चहरे साथ तो है पर अनज़ान है
अर्सो बीते मकान बनाया, घर की तलाश अब भी जारी है

आदतों का सफर तो देखो, सुकून तक आ पंहुचा है
अपना अपना हिस्सा खुशियों का हर कोई अब बाँट रहा है

वक्त के पाँव बेड़ियाँ बाँधे मानो कोई तो यह कहता है
 खूब भाग लिया खुदसे यारो अब ये मुलाकात भी जरुरी है  


रुचिरा 

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